छठ महापर्व: चार दिन तक चलने वाले इस पर्व में हर दिन का है खास महत्व, यहां जानिए विस्तार से

10/24/2017 4:05:32 PM
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मंगलवार यानि आज से आरंभ हो चुका है छठ पर्व. पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत, बिहार और झारखंड के कई हिस्सों में इसे बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है. इस पर्व में भगवान सूर्य की पूजा की जाती है. कहा जाता है यह व्रत बेहद मुश्किल होता है. इसमें महिलाएं 36 घंटे तक बिना जल के रहती हैं. चार दिनों तक चलने वाला ये त्यौहार हिंदू पंचांग के मुताबिक, कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होता है और सप्तमी तक चलता है. प्रथम दिन नहाय खाय से शुरू होकर चतुर्थ दिन ऊषा अर्घ्य के साथ इस व्रत की समाप्ति होती है. जानते हैं हर दिन का क्या है खास महत्व:

पहला दिन- नहाय खाय: इस विधि में घर की साफ सफाई करने और स्नानादि करने के बाद शुद्ध शाकाहारी खाना खाया जाता है . व्रती के भोजन करने के बाद ही घर के बाकि सदस्य भोजन करते हैं और फिर इस व्रत की शुरुआत होती है.

दूसरा दिन- खरना: छठ पूजा के दूसरे दिन खरना की विधि होती है. इस दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना होता है. यहां तक कि पानी भी नहीं पिया जाता. शाम को गन्ने का जूस या गुड़ के चावल या गुड़ की खीर का प्रसाद बांटा जाता है. इसके बाद से ही 36 घंटे का कड़ा निर्जला व्रत शुरू होता है.

तीसरा दिन- संध्या अर्घ्य: इस दिन व्रती नदी या तालाब में उतरकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देता है. इसे संध्या अर्घ्य कहा जाता है. इस दिन प्रसाद स्वरूप ठेकुआ और चावल के लड्डू बनाए जाते हैं. रात में छठी माता के गीत गाए जाते हैं और इस व्रत की कथा का पाठ होता है.

अंतिम दिन- ऊषा अर्घ्य: छठ पूजा के चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इसे ऊषा अर्घ्य कहते हैं. इस दिन सूर्य निकलने से पहले ही लोग नदी या तालाब के घाट पर पहुंच जाते हैं. व्रती पानी में उतर कर सूर्य को अर्घ्य देती है. इसके बाद घाट पर ही पूजा की जाती है. पूजन के बाद व्रती प्रसाद खाकर व्रत खोलती है और प्रसाद को सभी में बांट दिया जाता है.

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