जानें मकर संक्रांति से जुड़े त्यौहारों के बारे में

1/13/2018 11:37:53 AM
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मकर संक्रान्ति मुहूर्त 
पुण्य काल मुहूर्त : 13:35:10 से 17:45:16 तक
अवधि : 4 घंटे 10 मिनट
महापुण्य काल मुहूर्त : 13:35:10 से 13:59:10 तक
अवधि : 0 घंटे 24 मिनट
संक्रांति पल : 13:35:10

मकर संक्रांति 2018
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति एक प्रमुख पर्व है. भारत के विभिन्न इलाकों में इस पर्व को स्थानीय मतों के अनुरूप मनाया जाता है. हर वर्ष अमूमन मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती है. इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है, जबकि उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुरूप, इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है.  ज्यादातर हिंदू त्यौहारों की गणना चंद्रमा पर आधारित पंचांग के द्वारा की जाती है परन्तु मकर संक्रांति पर्व सूर्य पर आधारित पंचांग की गिनती से मनाया जाता है. मकर संक्रांति से ही ऋतु में बदलाव होने लगता है. शरद ऋतु कम होने लगती है और बसंत का आगमन शुरू हो जाता है. इसके परिणामस्वरूप दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी हो जाती है.

मकर संक्रांति का महत्व
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण” भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिये से मकर संक्रांति का बड़ा ही महत्व है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं. चूंकि शनि मकर व कर्क राशि का स्वामी है. लिहाजा यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है.

एक अन्य कथा के अनुसार असुरों पर भगवान विष्णु की विजय के तौर पर भी मकर संक्रांति मनाई जाती है. बताया जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था. तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा.

फसलों की कटाई का त्यौहार: नई फसल और नई ऋतु के आगमन के तौर पर भी मकर संक्रांति धूमधाम से मनाई जाती है. पंजाब, यूपी, बिहार समेत तमिलनाडु में यह वक्त नई फसल काटने का होता है, इसलिए किसान मकर संक्रांति को आभार दिवस के रूप में मनाते हैं. खेतों में गेहूं और धान की लहलहाती फसल किसानों की मेहनत का परिणाम होती है लेकिन यह सब ईश्वर और प्रकृति के आशीर्वाद से संभव होता है. पंजाब और जम्मू-कश्मीर में मकर संक्रांति को ’लोहड़ी’ के नाम से मनाया जाता है. तमिलनाडु में मकर संक्रांति ’पोंगल’ के तौर पर मनाई जाती है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में ’खिचड़ी’ के नाम से मकर संक्रांति मनाई जाती है. मकर संक्रांति पर कहीं खिचड़ी बनाई जाती है तो कहीं दही चूड़ा और तिल के लड्डू बनाये जाते हैं.

लौकिक महत्व: पूर्व के कड़वे अनुभवों को भुलकर मनुष्य आगे की ओर बढ़ता है. स्वयं भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है कि, उत्तरायण के 6 माह के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं, तब पृथ्वी प्रकाशमय होती है, अत: इस प्रकाश में शरीर का त्याग करने से मनुष्य का पुनर्जन्म नहीं होता है और वह ब्रह्मा को प्राप्त होता है. महाभारत काल के दौरान भीष्म पितामह जिन्हें इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था. उन्होंने भी मकर संक्रांति के दिन शरीर का त्याग किया था.

मकर संक्रांति से जुड़े त्यौहार: भारत में मकर संक्रांति के दौरान जनवरी माह में नई फसल का आगमन होता है. इस मौके पर किसान फसल की कटाई के बाद इस त्यौहार को धूमधाम से मनाते हैं. भारत के हर राज्य में मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है.

पोंगल: पोंगल दक्षिण भारत में विशेषकर तमिलनाडु, केरल और आंध्रा प्रदेश में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है. पोंगल विशेष रूप से किसानों का पर्व है. इस मौके पर धान की फसल कटने के बाद लोग खुशी प्रकट करने के लिए पोंगल का त्यौहार मानते हैं. पोंगल का त्यौहार ’तइ’ नामक तमिल महीने की पहली तारीख यानि जनवरी के मध्य में मनाया जाता है. 3 दिन तक चलने वाला यह पर्व सूर्य और इंद्र देव को समर्पित है. पोंगल के माध्यम से लोग अच्छी बारिश, उपजाऊ भूमि और बेहतर फसल के लिए ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करते हैं. पोंगल पर्व के पहले दिन कूड़ा-कचरा जलाया जाता है, दूसरे दिन लक्ष्मी की पूजा होती है और तीसरे दिन पशु धन को पूजा जाता है.

उत्तरायण: उत्तरायण खासतौर पर गुजरात में मनाया जाने वाला पर्व है. नई फसल और ऋतु के आगमन पर यह पर्व 14 और 15 जनवरी को मनाया जाता है. इस मौके पर गुजरात में पतंग उड़ाई जाती है साथ ही पतंग महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जो दुनियाभर में मशहूर है. उत्तरायण पर्व पर व्रत रखा जाता है और तिल व मूंगफली दाने की चक्की बनाई जाती है.

लोहड़ी: लोहड़ी विशेष रूप से पंजाब में मनाया जाने वाला पर्व है, जो फसलों की कटाई के बाद 13 जनवरी को धूमधाम से मनाया जाता है. इस मौके पर शाम के समय होलिका जलाई जाती है और तिल, गुड़ और मक्का अग्नि को भोग के रूप में चढ़ाई जाती है.

माघ/भोगली बिहू: असम में माघ महीने की संक्रांति के पहले दिन से माघ बिहू यानि भोगाली बिहू पर्व मनाया जाता है. भोगाली बिहू के मौके पर खान-पान धूमधाम से होता है. इस समय असम में तिल, चावल, नरियल और गन्ने की फसल अच्छी होती है. इसी से तरह-तरह के व्यंजन और पकवान बनाकर खाये और खिलाये जाते हैं. भोगाली बिहू पर भी होलिका जलाई जाती है और तिल व नरियल से बनाए व्यंजन अग्नि देवता को समर्पित किए जाते हैं. भोगली बिहू के मौके पर टेकेली भोंगा नामक खेल खेला जाता है साथ ही भैंसों की लड़ाई भी होती है.

वैशाखी: वैशाखी पंजाब में सिख समुदाय द्वारा मनाये जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है. वैशाखी के मौके पर पंजाब में गेहूं की फसल कटने लगती है और किसानों का घर खुशियों से भर जाता है. गेहूं को पंजाब के किसान कनक यानि सोना मानते हैं. वैशाखी के मौके पर पंजाब में मेले लगते हैं और लोग नाच गाकर अपनी खुशियों का इजहार करते हैं. नदियों और सरोवरों में स्नान के बाद लोग मंदिरों और गुरुद्वारों में दर्शन करने जाते हैं.

मकर संक्रांति पर परंपराएं: मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने लड्डू और अन्य मीठे पकवान बनाने की परंपरा है. तिल और गुड़ के सेवन से ठंड के मौसम में शरीर को गर्मी मिलती है और यह स्वास्थ के लिए लाभदायक है. ऐसी मान्यता है कि, मकर संक्रांति के मौके पर मीठे पकवानों को खाने और खिलाने से रिश्तों में आई कड़वाहट दूरी होती है. कहा यह भी जाता है कि मीठा खाने से वाणी और व्यवहार में मधुरता आती है और जीवन में खुशियों का संचार होता है. मकर संक्रांति के मौके पर सूर्य देव के पुत्र शनि के घर पहुंचने पर तिल और गुड़ की बनी मिठाई बांटी जाती है.

तिल और गुड़ की मिठाई के अलावा मकर संक्रांति के मौके पर पतंग उड़ाने की भी परंपरा है. गुजरात और मध्य प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में मकर संक्रांति के दौरान पतंग महोत्सव का आयोजन किया जाता है. इस मौके पर बच्चों से लेकर बड़े तक पतंगबाजी करते हैं. पतंग बाजी के दौरान पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से गुलजार हो जाता है.

तीर्थ दर्शन और मेले: मकर संक्रांति के मौके पर देश के कई शहरों में मेले लगते हैं. खासकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत में बड़े मेलों का आयोजन होता है. इस मौके पर लाखों श्रद्धालु गंगा और अन्य पावन नदियों के तट पर स्नान और दान, धर्म करते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि, जो मनुष्य मकर संक्रांति पर देह का त्याग करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह जीवन-मरण के चक्कर से मुक्त हो जाता है.
 

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