जानिये अलौकिक पटनदेवी मंदिर की खासियत

9/23/2017 10:27:07 AM
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गुलजारबाग के पास स्थित श्री बड़ी पटनदेवी मंदिर सती के 51 शक्तिपीठों में प्रमुख है। जहां शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। देश के कई भागों के लोग यहां माता का आशीर्वाद लेने आते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां सती का दाहिना जंघा व वस्त्र गिरा था। इसी से इस क्षेत्र का नाम पाटलिपुत्र पड़ा।

इस शक्तिपीठ में काले पत्थर की बनी महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती की प्रतिमा स्थापित है। इसके अलावा यहां भैरव की प्रतिमा भी है। जिसे व्योमकेश के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि मंदिर में विराजमान प्रतिमाएं सतयुग की हैं। अशोक काल में यहां माता का छोटा मंदिर था जिसे भक्तों द्वारा बाद में विशाल रूप दिया गया। मंदिर परिसर में ही योनिकुंड है जिसके बारे में कहा जाता है कि इसमें डाली गयी हवन सामाग्री भष्म के रूप में भूगर्भ में चली जाती है। नवरात्र के दौरान चौबीसो घंटे भक्तों का तांता लगा रहता है।

मां पटनेश्वरी को प्रतिदिन महाप्रसाद के रूप में दिन में कच्ची व रात में पक्की प्रसाद का भोग लगता है। अहले सुबह घंटा, शंख, मृदंग व करतल ध्वनि के साथ माता की आरती होती है और फिर श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन को उमड़ पड़ती है। महाअष्टमी की रात विशेष श्रृंगार भोग के बाद महानिशा पूजा का अनुष्ठान होता है। यह मंदिर कौलिक मंत्र की सिद्धि के लिए काफी प्रचलित है। यहां पशुओं की बलि देने की परंपरा रही है। श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ति के बाद पशु या नारियल की बलि देते हैं। नवरात्र के अष्टमी, नवमी व रामनवमी के दिन यहां भीड़ उमड़ती है। नवरात्र में राजधानी के हर भाग से श्रद्धालु यहां दर्शन करने की कामना के साथ पहुंचते हैं। महंत पं.विजयशंकर गिरि कहते हैं कि नवरात्र के दौरान मां पटनेश्वरी का दर्शन करने से मनोवांछित फल मिलता है।

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