धनतेरस पर इस मंत्र का पाठ करने से दूर होते हैं आर्थिक संकट

10/16/2017 7:15:15 PM
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धनतेरस के दिन इस मंत्र का पाठ करने से विभन्न तरह के आर्थिक संकट दूर होते है। बाद में इस मंत्र का प्रात:काल रोज दीपक जलाकर जाप करने से घोर आर्थिक संकटों से भी राहत मिलती है।

मंत्र:

ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर।

भूरिरेदिन्द्र दित्ससि।

ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्।

आ नो भजस्व राधसि।।´  

अर्थात: हे लक्ष्मीपते ! आप दानी हैं, साधारण दानदाता ही नहीं बहुत बड़े दानी हैं। आप्तजनों से सुना है कि संसार भर से निराश होकर जो याचक आपसे प्रार्थना करता है, उसकी पुकार सुनकर उसे आप आर्थिक कष्टों से मुक्त कर देते हैं, उसकी झोली भर देते हैं। हे प्रभु, मुझे अर्थ संकट से मुक्त कर दो।

धन तेरस का महत्व: दिवाली के त्यौहार की शुरुआत धन तेरस से होती है। धन का मतलब पैसा और सम्पति होता है और तेरस कृष्णा पक्ष का तेरवां दिन है। यह कार्तिक मस में आता है। हिन्दू समाज में धनतेरस सुख-समृद्धि, यश और वैभव का पर्व माना जाता है। इस दिन धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के देव धन्वंतरि की पूजा का बड़ा महत्त्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस महापर्व के बारे में स्कन्द पुराण में लिखा है कि इसी दिन देवताओं के वैद्य धन्वंतरि अमृत कलश सहित सागर मंथन से प्रकट हुए थे, जिस कारण इस दिन धनतेरस के साथ-साथ धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है।

धन तेरस पूजा विधि :

एक लकड़ी के बेंच पर रोली के माध्यम से स्वस्तिक का निशान बनाये।

फिर एक मिटटी के दिए को उस बेंच पर रख कर जलाएं।

दिए के पास तीन बारी गंगा जल का छिड़काव करें।

दिए पर रोली का तिलक लगायें। उसके बाद तिलक पर चावल रखें।

दिए में थोड़ी चीनी डालें।

इसके बाद 1 रुपये का सिक्का दिए में डालें।

दिए पर थोड़े फूल चढ़ाये।

दिए को प्रणाम करें।

परिवार के सदस्यों को तिलक लगायें।

अब दिए को अपने घर के मेन गेट के पास रखें। उसे दाहिने तरफ रखें और यह सुनिश्चित करें कि दिए की लौ दक्षिण दिशा की तरफ हो।

इसके बाद यम देव के लिए मिटटी का दिया जलायें और फिर धन्वान्तारी पूजा घर में करें।

अपने पूजा घर में भेठ कर धन्वान्तारी मंत्र का 108 बार जाप करें। “ॐ धन धनवंतारये नमः। जब आप 108 बारी मंत्र का जाप कर चुके होंगे तब इन पंक्तियों का उच्चारण करें “है धन्वान्तारी देवता में इन पंक्तियों का उच्चारण अपने चरणों में अर्पण करता हूँ।

धन्वान्तारी पूजा के बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पंचोपचार पूजा करना अनिवार्य है।

भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के लिए मिटटी के दियें जलाएं। धुप जलाकर उनकी पूजा करें। भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के चरणों में फूल चढायें और मिठाई का भोग लगायें।

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