कृष्ण की लीलायें जिन्हें देख लोगों ने उन्हें बनाया भगवान श्री कृष्‍ण

8/23/2016 7:29:30 PM
img

हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक श्री कृष्‍ण भगवान विष्णु के अवतार कहे जाते हैं. लेकिन उन्हें भगवान के रूप में क्यों पूजा जाता है इसके पीछे हैं उनकी लीलाएं. आज हम उन्हीं लीलाओं के बारे में बता रहे हैं. श्री कृष्‍ण का जन्म कंस के कारावास में हुआ और जन्म के समय कारावास के दरवाजे खुल गए और सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए. जन्म के  आकाशवाणी भी हुई क‌ि नवजात बच्चे को नंदगांव में नंदराय जी के घर पहुंचा दो और इसके बदले नंदराय की नवजात कन्या ले आओ. यहीं से उनकी लीलाएं शुरू हो गई थी.

कृष्ण के पैदा होने की सूचना जैसे ही कंस को मिली उसने पूतना नाम की राक्षसी को कृष्‍ण को मारने के ल‌िए भेजा. श्री कृष्‍ण ने पूतना के वक्ष स्‍थल से उसके प्राण ही खींच ल‌िए और व‌िशालकाय राक्षसी खुद मृत्यु को प्राप्त हो गई. पूतना ने नंदगांव के सभी नवजात बच्चों को मार डाला था लेक‌िन नन्हें कृष्‍ण ने पूतना को ही मार दिया.

काल‌िया नाग को भी कंस ने ही कृष्ण को मारने के लिए यमुना में भेज दिया. कालिया नाग के जहर से यमुना का जल काला पड़ गया. यहाँ भी श्री कृष्‍ण ने अपनी लीला दिखाई और खेलते-खेलते गेंद को पानी में गिरा दिया पहुंच गए काल‌िया नाग के सामने. काल‌िया का वध कृष्‍ण करने ही वाले थे क‌ि नाग कन्याएं प्राण की रक्षा की प्रार्थना करने लगी. इस पर काल‌िया ने श्री कृष्‍ण के सामने स‌िर झुका द‌िया और श्री कृष्‍ण ने काल‌िया के फन पर खड़े होकर नटराज के रूप में नृत्य करना शुरू कर द‌िया.

नंदगांव के लोगों और पशुओं को बकाहने के लिए श्री कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और इससे विवश होकर इंद्र को उनसे माफ़ी मांगने के लिए आना पड़ा. लोग कृष्ण की इस लीला को देखकर समझ गए यह कोई महामानव ही है. 

कंस के पहलवानों को पराज‌ित करके कंस का वध करना क‌िसी सामान्य व्यक्त‌ि के वश की बात नहीं थी. जैसे ही श्री कृष्‍ण ने कंस का वध क‌िया चारों द‌िशों से श्री कृष्‍ण के जयकारे गूंज उठे.

अपने गुरु के मृत पुत्र को गुरु दक्षिणा में जीवन दान दिया. इससे गुरु को यकीन हो गया क‌ि श्री कृष्‍ण मनुष्य देह धारण क‌िए हुए वास्तव में परमात्मा हैं क्योंक‌ि मरे हुए व्यक्त‌ि को जीव‌ित करना क‌िसी मनुष्य या सामान्य देवता के वश की बात नहीं है.

द्रौपदी के चीर हरण के समय ने श्री कृष्‍ण ने ही उनका मान बचाया था. कृष्ण का ध्यान करने पर द्रौपदी की साड़ी इतनी लंबी होती चली गई क‌ि दुशासन थक गया. इस तरह श्री कृष्‍ण ने द्रौपदी की लाज बचाई. इस लीला के बाद से कृष्ण भगवान बन गए.

जब श्री कृष्‍ण पांडवों के दूत बनकर दुर्योधन के पास पहुंचे तो दुर्योधन ने श्री कृष्‍ण को बंदी बनाने का आदेश द‌िया. इसके बाद श्री कृष्‍ण ने अपना द‌िव्य रूप धारण किया जिसके साक्षी सभा में बैठे सभी लोग बने.

महाभारत के युद्ध में मरने वालों की संख्या की भव‌िष्यवाणी करना भी उनके प्रभु होने का प्रमाण देता है.

श्री कृष्‍ण की सबसे भव्य लीला थी उनका वह व‌िराट स्वरुप जो उन्होंने अर्जुन को दिखाया. जिससे अर्जुन को जीवन और मृत्यु के रहस्य को पहचान पाया. इस व‌िराट रूप के बाद कोई शक नहीं रह जाता क‌ि श्री कृष्‍ण मानव देह में श्री व‌िष्‍णु के अवतार हैं.
 

Similar Post You May Like